MDDA में AE शशांक और बाबू विक्रांत पर गंभीर आरोप, अवैध निर्माण के खेल में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

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मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के विकासनगर कार्यालय में अवैध निर्माण को लेकर ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप हैं कि क्षेत्र में अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है और कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। इस पूरे मामले में सहायक अभियंता शशांक सक्सेना और कार्यालय में तैनात बाबू विक्रांत की भूमिका सवालों के घेरे में है।

 

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मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब बाबू विक्रांत ने अपनी सफाई देते हुए कथित तौर पर सहायक अभियंता शशांक सक्सेना पर ही गंभीर आरोप लगा दिए। बाबू के आरोपों के मुताबिक, निर्माण संबंधी फाइलों को दबाकर रखने और उनके निस्तारण में देरी करने का जिम्मेदार सहायक अभियंता है। इतना ही नहीं, फाइलों को दबाकर मोटी रकम की वसूली किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

 

बाबू की भूमिका पर भी सवाल, क्या मिलीभगत के बिना संभव है ‘फाइलों का खेल’?

 

सहायक अभियंता पर आरोप लगाकर बाबू विक्रांत ने अपनी सफाई तो दे दी, लेकिन अब सवाल उनकी खुद की भूमिका पर भी उठ रहे हैं। आखिर कार्यालय में फाइलों का संचालन किसके जिम्मे है? यदि फाइलें दबाई जा रही थीं, तो बाबू की भूमिका क्या थी? क्या उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी या फिर पूरा मामला कथित मिलीभगत का है?

 

यदि सहायक अभियंता पर फाइलें दबाकर वसूली के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो यह भी जांच का विषय है कि संबंधित फाइलें किस स्तर पर रोकी गईं, किन-किन कर्मचारियों के पास रहीं और उनके निस्तारण में कितनी देरी हुई।

 

अवैध निर्माण पर कार्रवाई या सिर्फ दिखावा?

 

विकासनगर क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यदि प्राधिकरण को निर्माण की जानकारी है, तो फिर कार्रवाई प्रभावी क्यों नहीं दिखाई दे रही? क्या नोटिस जारी करने और औपचारिक कार्रवाई के बाद जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं?

 

अवैध निर्माण के मामलों में यदि फाइलें दबाकर रखी जाती हैं, तो इसका सीधा लाभ निर्माणकर्ताओं को मिल सकता है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि कहीं विभागीय स्तर पर लापरवाही या कथित मिलीभगत के कारण अवैध निर्माण को संरक्षण तो नहीं मिल रहा।

 

जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल

 

अब MDDA के उच्चाधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि क्या विकासनगर कार्यालय की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच होगी? सहायक अभियंता शशांक सक्सेना पर लगाए गए आरोपों के साथ बाबू विक्रांत की भूमिका की भी जांच जरूरी है।

 

कार्यालय की निर्माण संबंधी फाइलों, शिकायतों, नोटिसों, कार्रवाई की रिपोर्ट और फाइलों के निस्तारण की समयसीमा की जांच से कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

 

अब सवाल यह है कि विकासनगर कार्यालय में आखिर किसका दबदबा है? सहायक अभियंता का, बाबू का या फिर कथित मिलीभगत के उस सिस्टम का, जिसमें अवैध निर्माण पर कार्रवाई के बजाय फाइलों का खेल चलने के आरोप लग रहे हैं?

 

MDDA के जिम्मेदार अधिकारियों को इन आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।

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