हरिद्वार । अर्धकुंभ की तैयारियों के बीच हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) में उत्तर प्रदेश से प्रतिनियुक्ति पर आए अभियंता राजन सिंह की तैनाती अब राजनीतिक और सामाजिक सवालों के घेरे में आती दिखाई दे रही है। राजन सिंह को HRDA में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने के खिलाफ सुराज सेवा दल ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश जोशी ने सरकार से उनकी प्रतिनियुक्ति और तैनाती को लेकर जवाब मांगा है।
सुराज सेवा दल का सीधा सवाल है कि जब उत्तराखंड के विभिन्न विभागों और प्राधिकरणों में अनुभवी अभियंता उपलब्ध हैं, तो फिर उत्तर प्रदेश से राजन सिंह को प्रतिनियुक्ति पर बुलाकर HRDA जैसे महत्वपूर्ण प्राधिकरण में जिम्मेदारी देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? संगठन ने उनकी तैनाती को लेकर नियमों, प्रक्रिया और चयन के आधार को सार्वजनिक करने की मांग की है।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि राजन सिंह को उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण में अधीक्षण अभियंता के पद पर प्रतिनियुक्ति के साथ HRDA में अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें यूनिटी मॉल की परियोजना का हवाला देते हुए यह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई। इसी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि एक ही अधिकारी को अलग-अलग स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की जरूरत क्यों पड़ी।
55 वर्ष की उम्र के बाद प्रतिनियुक्ति का सवाल
सुराज सेवा दल ने राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति में उम्र संबंधी नियमों की भी जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि प्रतिनियुक्ति से जुड़े शासनादेश और नियमों के मुताबिक यदि संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति में निर्धारित अवधि से कम समय बचा हो तो ऐसी तैनाती पर सवाल खड़े होते हैं। इसी आधार पर रमेश जोशी ने सरकार से राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति का मूल आदेश और उस पर लागू नियम सार्वजनिक करने की मांग की है।
अर्धकुंभ के सैकड़ों करोड़ के काम, इसलिए सवाल और बड़ा
HRDA में अर्धकुंभ से जुड़े करोड़ों रुपये के विकास एवं निर्माण कार्य होने हैं। ऐसे में सुराज सेवा दल का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण समय में किसी बाहरी राज्य के अधिकारी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
संगठन का सवाल है कि अगर उत्तराखंड में योग्य अभियंताओं की कमी नहीं है तो फिर राजन सिंह को ही क्यों चुना गया? क्या प्रदेश में ऐसा कोई अधिकारी उपलब्ध नहीं था जिसे यह जिम्मेदारी दी जा सकती थी? आखिर राजन सिंह में ऐसी क्या विशेष आवश्यकता या विशेषज्ञता थी जिसके चलते उन्हें दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की जरूरत पड़ी?
राजन सिंह को हटाने की मांग, आंदोलन की चेतावनी
सुराज सेवा दल ने राजन सिंह को HRDA की जिम्मेदारी से हटाकर उत्तराखंड के किसी योग्य अभियंता को जिम्मेदारी देने की मांग की है। संगठन ने सरकार को समयसीमा देते हुए चेतावनी दी थी कि मांग पूरी नहीं होने पर HRDA में आंदोलन किया जाएगा।
रमेश जोशी का कहना है कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के विरोध से अधिक नियमों, पारदर्शिता और उत्तराखंड के अधिकारियों के अधिकारों से जुड़ा है। संगठन यह जानना चाहता है कि राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति किस आधार पर हुई, उन्हें HRDA में अतिरिक्त जिम्मेदारी देने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इसके पीछे शासन की वास्तविक आवश्यकता क्या थी।
अब सवाल सरकार से
राजन सिंह की तैनाती को लेकर सवाल लगातार बढ़ रहे हैं। HRDA की आधिकारिक वेबसाइट पर भी राजन सिंह को लेकर विभागीय जिम्मेदारियों का उल्लेख अलग-अलग रिपोर्टों में सामने आया है, जबकि प्राधिकरण की प्रशासनिक संरचना में सचिव के रूप में प्रत्यूष सिंह और उपाध्यक्ष के रूप में सोनिका का नाम दर्ज है।
अब देखने वाली बात यह है कि सुराज सेवा दल के सवालों पर सरकार और आवास विभाग क्या जवाब देता है? क्या राजन सिंह की प्रतिनियुक्ति से जुड़े शासनादेश और नियम सार्वजनिक किए जाएंगे? क्या उनकी तैनाती की समीक्षा होगी? या फिर अर्धकुंभ जैसे बड़े आयोजन के बीच उठ रहे इन सवालों को नजरअंदाज कर दिया जाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि राजन सिंह की HRDA में तैनाती का मामला अब सिर्फ विभागीय नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा है। सुराज सेवा दल के मोर्चा खोलने के बाद यह मामला शासन की पारदर्शिता और प्रतिनियुक्ति व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल बन गया है।चाहें तो मैं इसी खबर का भी बना सकता हूं।
