उत्तराखंड सरकार ने जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए राज्यभर में अमानकीकृत डेयरी एनालॉग और गैर-दुग्ध उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने यह सख्त कदम उठाया है।
यह आदेश उन उत्पादों पर लागू होता है जो पनीर, घी या मक्खन जैसे दिखते हैं लेकिन उनमें दूध के बजाय वनस्पति वसा या अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया जाता है, जिससे उपभोक्ता भ्रमित होते हैं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत यह प्रतिबंध एक वर्ष या एफएसएसएआई द्वारा अंतिम मानक तय किए जाने तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, मानकों के अनुरूप फ्रोजन डेजर्ट और प्रोसेस्ड चीज जैसे उत्पाद इससे बाहर रहेंगे।
विभाग द्वारा राज्यभर में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा, जिसमें डेयरी इकाइयों, गोदामों और बाजारों की औचक जांच होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जब्तीकरण, लाइसेंस निरस्तीकरण और मुकदमे जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने कारोबारियों से मानकों के अनुरूप ही व्यापार करने की अपील की है। सरकार के इस कदम से मिलावटखोरों पर शिकंजा कसेगा और उपभोक्ताओं को शुद्ध खाद्य पदार्थ मिल सकेंगे।
