फाइलें पूछ रहीं सवाल, अफसरशाही देगी जवाब? टिहरी प्राधिकरण में इंजीनियर तिवारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

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जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण टिहरी में प्रतिनियुक्ति पर तैनात इंजीनियर दिग्विजय नाथ तिवारी की कार्यप्रणाली को लेकर अब विभाग के भीतर से ही गंभीर सवाल उठने लगे हैं। प्राधिकरण के सहायक अभियंता ने 19 सितंबर 2026 को उपाध्यक्ष को भेजे पत्र में कई पत्रावलियों का हवाला देते हुए कथित अनियमितताओं, भू-उपयोग से जुड़े फैसलों और संभावित वित्तीय नुकसान की जांच की मांग की है।

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एक शिकायत और खुल गई कई फाइलों की कहानी

शिकायत में TSN/CR/0002/24-25 सहित कई फाइलों का उल्लेख है। आरोप है कि कुछ मामलों में भूमि के उपयोग और मास्टर प्लान में दर्ज स्थिति को लेकर विरोधाभास सामने आया और उसके बावजूद स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

TSN/NC/0004/24-25/RE1 में 2000 वर्गमीटर से अधिक भूखंड से जुड़े भू-उपयोग शुल्क का मुद्दा उठाया गया है। शिकायत में मौजूदा दरों के आधार पर करीब 1.46 करोड़ रुपये की राशि का उल्लेख करते हुए प्राधिकरण को संभावित वित्तीय नुकसान का सवाल खड़ा किया गया है।

₹72 लाख की बैंक गारंटी का सवाल—बिना गारंटी नक्शा कैसे?

सबसे गंभीर सवालों में एक TSN/L/0001/24-25 फाइल को लेकर है। शिकायतकर्ता के अनुसार भवन उपविधि के तहत करीब 72 लाख रुपये की बैंक गारंटी लिया जाना आवश्यक था, लेकिन आरोप है कि बैंक गारंटी लिए बिना ही मानचित्र स्वीकृत कर दिया गया।

अब सवाल सीधा है—अगर नियम में बैंक गारंटी जरूरी थी, तो वह प्रक्रिया पूरी हुए बिना स्वीकृति कैसे आगे बढ़ी?

₹2.18 करोड़ की संभावित वित्तीय हानि का भी उल्लेख

ग्राम कौड़ियाला, तहसील पावकी देवी से संबंधित TSN/NC/0014/23-24 फाइल में भी शिकायतकर्ता ने 2000 वर्गमीटर से अधिक भूमि पर लागू भू-उपयोग शुल्क का उल्लेख किया है। शिकायत में मौजूदा दरों के आधार पर करीब 2.18 करोड़ रुपये की संभावित राशि का जिक्र करते हुए प्राधिकरण को वित्तीय नुकसान का आरोप लगाया गया है।

मुनि की रेती का होटल नक्शा भी सवालों के घेरे में

शिकायत में मुनि की रेती में 5/7 स्टार होटल से संबंधित नक्शे का भी उल्लेख है। आरोप है कि एक फाइल में स्थल का भू-उपयोग अलग तरीके से दर्शाया गया, जबकि दूसरी पत्रावली में उसी स्थल को पार्क एवं खुले स्थान के रूप में दर्शाए जाने की बात कही गई है।

यानी सवाल सिर्फ नक्शे का नहीं—रिकॉर्ड में एक ही जमीन की तस्वीर अलग-अलग क्यों दिखाई गई, इसकी जांच कौन करेगा?

सीलिंग कार्रवाई पर भी उठे सवाल

शिकायत में नरेंद्रनगर तहसील क्षेत्र में अनधिकृत निर्माणों पर सीलिंग कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। साथ ही पूर्व में की गई सीलिंग के बावजूद काम किए जाने की बात कही गई है।

यदि शिकायत में लगाए गए ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करने और प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा का सवाल भी सामने आएगा।

अब सवाल इंजीनियर तिवारी से ज्यादा सिस्टम से

मामले की सबसे बड़ी बात यह है कि आरोप बाहर से नहीं, बल्कि विभागीय स्तर से लिखित शिकायत के रूप में सामने आए हैं। शिकायत की प्रतिलिपि सचिव, आवास विभाग, उत्तराखंड शासन और जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल को भी भेजी गई है। शिकायतकर्ता ने सभी प्रकरणों की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

अब असली सवाल शासन के सामने है—

फाइलें खुलेंगी या मामला फाइलों में ही बंद रहेगा?

₹72 लाख की बैंक गारंटी से लेकर करोड़ों के संभावित शुल्क तक उठे सवालों की जांच होगी या फिर सरकारी कागजों का यह ‘सवालनामा’ भी बाकी शिकायतों की तरह अलमारी में बंद हो जाएगा?

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