जिला विकास प्राधिकरण टिहरी में नक्शा स्वीकृति को लेकर उठा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। सहायक अभियंता के लिखित स्पष्टीकरण ने पूरे मामले का फोकस ही बदल दिया है। एई ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि उनके स्तर से की गई नक्शा स्वीकृति की कार्रवाई नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप थी। साथ ही, उन्होंने प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पर कथित रूप से गलत नक्शा पास कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
यानी सवाल अब यह नहीं कि सहायक अभियंता ने नियमों का पालन किया या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि अगर एई नियमों के मुताबिक काम कर रहे थे तो उन पर कथित दबाव क्यों बनाया गया?
एई का जवाब: नियमों से बाहर नहीं गया फैसला
मामला TSN/CC/0011/26-27, अमित गुप्ता के नक्शे से जुड़ा है। ऐसे में सहायक अभियंता की भूमिका पर सवाल उठाने से पहले यह देखना जरूरी है कि उन्होंने फाइल पर क्या निर्णय लिया और वह निर्णय किन नियमों के आधार पर लिया गया।
जब तकनीकी अधिकारी लिखित रूप से नियमों के तहत कार्रवाई की बात कह रहा है, तो असली जांच उस कथित दबाव की होनी चाहिए जिसका उल्लेख उसी स्पष्टीकरण में किया गया है।
उपाध्यक्ष की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल?
सहायक अभियंता के लिखित स्पष्टीकरण में उपाध्यक्ष पर गलत नक्शा पास कराने के लिए दबाव बनाने का आरोप सामने आया है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल एक नक्शे की फाइल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सवाल भी उठेगा कि क्या तकनीकी अधिकारियों को नियमों के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता है या नहीं
फिलहाल आरोप की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज अधिकारी के लिखित बयान को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।
15 सितंबर की बैठक और CCTV अब सबसे अहम
मामले में 15 सितंबर को हुई UHUDA बैठक की कार्यवाही तथा CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की मांग ने विवाद को और गंभीर बना दिया है।
अगर बैठक में नक्शे को लेकर कोई दबाव, निर्देश या बातचीत हुई थी, तो CCTV फुटेज और बैठक का रिकॉर्ड काफी कुछ साफ कर सकता है।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है—क्या 15 सितंबर की बैठक की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाएगी?
एई को हटाने या कठघरे में खड़ा करने से पहले ये सवाल जरूरी
सहायक अभियंता ने अपने लिखित जवाब में नियमों के तहत कार्रवाई का पक्ष रखा है। ऐसे में किसी तकनीकी अधिकारी को दोषी ठहराने से पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित नक्शे की वास्तविक स्थिति क्या थी? जवाब बिना सामने आए सहायक अभियंता की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना अधूरा निष्कर्ष होगा।
एक तरफ सहायक अभियंता का लिखित स्पष्टीकरण है, जिसमें नियमों के अनुसार काम करने की बात कही गई है और दूसरी तरफ उसी स्पष्टीकरण में उपाध्यक्ष पर लगाए गए कथित दबाव के आरोप हैं।
अब जरूरत इस बात की है कि सहायक अभियंता को कटघरे में खड़ा करने के बजाय कथित दबाव की निष्पक्ष जांच हो और 15 सितंबर की बैठक का रिकॉर्ड व CCTV फुटेज सुरक्षित रखकर पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जाए।
क्योंकि अगर तकनीकी अधिकारी नियमों के अनुसार काम कर रहा था, तो सवाल उस पर नहीं—उस व्यवस्था पर होना चाहिए जहां नियमों के बीच कथित दबाव की गुंजाइश पैदा हुई।
इस पुरे मामले को लेकर उपाध्यक्ष से सम्पर्क साधने की कोशिस की गयी लेकिन अभीतक उनका कोई जवाब नहीं मिला
