हरियाली बचाने को मैदान में उतरे डीएम डॉ. आशीष चौहान, झड़ीपानी कटान प्रकरण की जांच शुरू”
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान का बड़ा एक्शन, पर्यावरण संरक्षण को लेकर दिखाई सख्ती खबर प्रकाशित होते ही प्रशासन हरकत में, दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी
देहरादून/मसूरी। मसूरी के झड़ीपानी क्षेत्र में कथित अवैध पेड़ कटान के मामले में प्रकाशित समाचार के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। जनहित और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की सक्रियता के चलते अब पूरे मामले की गहन जांच शुरू हो गई है।
जैसे ही झड़ीपानी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों के कटान और पर्यावरणीय क्षति की खबर सामने आई, जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई को स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी एक सकारात्मक संदेश के रूप में देख रहे हैं।
वन विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार झड़ीपानी क्षेत्र में अवैध पातन के मामले में वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है तथा संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के नेतृत्व में जिला प्रशासन लगातार यह संदेश दे रहा है कि विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। पिछले कुछ समय में भी जिलाधिकारी ने जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए कई मामलों में प्रभावी निर्णय लेकर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत किया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लंबे समय बाद ऐसा देखने को मिल रहा है कि किसी महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दे पर प्रशासन ने इतनी तत्परता से संज्ञान लिया है। लोगों का मानना है कि डॉ. आशीष चौहान की कार्यशैली के कारण अब अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो रही है तथा जनभावनाओं को भी गंभीरता से सुना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मसूरी की हरियाली और जलस्रोतों का संरक्षण केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का भी प्रश्न है। ऐसे में जिलाधिकारी द्वारा मामले को गंभीरता से लेना निश्चित रूप से एक सराहनीय कदम है।
झड़ीपानी प्रकरण में प्रशासन की सक्रियता के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई और भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।
जनता के बीच बढ़ रही चर्चा यही है कि देहरादून को ऐसा जिलाधिकारी मिला है जो केवल कार्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनहित और पर्यावरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी तत्काल निर्णय लेकर प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित कर रहा है
