देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना की अध्यक्षता में बच्चों की सुरक्षा एवं संरक्षण पर एक राज्य स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पुलिस विभाग, जिला प्रोबेशन अधिकारियों, बाल कल्याण समितियों और विभिन्न एनजीओ के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के प्रमुख बिंदु:
• गहन चर्चा: राज्य में बाल तस्करी, बाल भिक्षावृत्ति, बाल श्रम, यौन शोषण और गुमशुदा बच्चों से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
• पुलिस को निर्देश: आयोग ने पुलिस विभाग को पिछले तीन वर्षों के गुमशुदा बच्चों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही, पुलिस अभियानों में शिक्षा विभाग की ‘ट्रैकिंग आईडी’ का उपयोग कर ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान करने और इन अभियानों की जानकारी बाल कल्याण समितियों के साथ साझा करने को कहा गया, ताकि रेस्क्यू किए गए बच्चों का प्रभावी फॉलोअप लिया जा सके।
• नशा मुक्ति पर जोर: डॉ. गीता खन्ना ने नशे की लत से जूझ रहे बच्चों के पुनर्वास के लिए उन्हें व्यस्कों से अलग एक पृथक स्थान पर रखने पर विशेष जोर दिया।
• समन्वय: आयोग ने स्पष्ट किया कि बच्चों के विरुद्ध बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए विभागों के बीच बेहतर तालमेल और त्वरित कार्रवाई अनिवार्य है।
अध्यक्ष ने दोहराया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और संरक्षित वातावरण प्रदान करना राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता और सामूहिक जिम्मेदारी है।
