कुम्भ से पहले HRDA पर गंभीर सवाल, UKD ने दी आंदोलन की चेतावनी

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HRDAहरिद्वार | विशेष संवाददाता

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हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) में कथित फर्जी पद, विवादित डेपुटेशन और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर उठे सवाल लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले में लगातार सामने आ रहे तथ्यों, दस्तावेजों और शिकायतों के बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर स्पष्ट जांच या जवाबदेही तय होती दिखाई नहीं दे रही है।

 

मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिन बिंदुओं पर तत्काल प्रशासनिक और विभागीय जांच होनी चाहिए थी, उन पर शासन और प्रशासन की चुप्पी कई नए सवाल खड़े कर रही है। आलोचकों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी की तैनाती, पदनाम और अधिकार क्षेत्र को लेकर सार्वजनिक रूप से विवाद मौजूद है, तो संबंधित विभागों का दायित्व बनता है कि वे स्थिति स्पष्ट करें। लेकिन अब तक ऐसा होता दिखाई नहीं दिया है।

 

विशेष सूत्रों के अनुसार, HRDA में अवैध प्लॉटिंग, अवैध निर्माण और आगामी कुम्भ से जुड़े कुछ टेंडरों में कथित अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही नियमों और प्रक्रियाओं को लेकर विवाद खड़े हो रहे हैं तो भविष्य में बड़े वित्तीय और प्रशासनिक प्रश्न भी उठ सकते हैं।

 

विवाद के केंद्र में रहे अधिकारी राजन सिंह की तैनाती को लेकर पहले ही सवाल उठाए जा चुके हैं। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि सरकारी अभिलेखों, वास्तविक पद और विभागीय व्यवस्था के बीच दिखाई दे रहे विरोधाभासों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

 

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर लगातार मीडिया रिपोर्ट, शिकायतों और सार्वजनिक चर्चाओं के बावजूद अब तक किसी सक्षम प्राधिकारी ने जांच की घोषणा क्यों नहीं की? क्या शासन पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराएगा या फिर शिकायतकर्ताओं को न्याय के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा?

 

इसी बीच उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने भी इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाना शुरू कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि सरकार समय रहते पूरे मामले पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती और निष्पक्ष जांच शुरू नहीं होती तो UKD राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता अपनाएगा

UKD का कहना है कि कुम्भ जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के आयोजन से जुड़े विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की मूल आवश्यकता है।

 

उधर शिकायतकर्ता पक्ष भी अब कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, पूरे प्रकरण को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की तैयारी चल रही है। याचिका में कथित अनियमितताओं, तैनाती प्रक्रिया, पद संबंधी विवाद तथा अन्य आरोपों की न्यायिक निगरानी में जांच की मांग की जा सकती है।

 

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शासन स्वयं आगे बढ़कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा, या फिर न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही इस बहुचर्चित विवाद की परतें खुलेंगी?

 

फिलहाल जनता जवाब मांग रही है, विपक्ष सवाल उठा रहा है और शासन की चुप्पी स्वयं एक बड़ा प्रश्न बन चुकी है।

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