चार करोड़ के वित्तीय आरोप, प्रतिनियुक्ति खत्म, अब वायरल वीडियो से घिरे टिहरी के AE दिग्गविजय तिवारी!
उत्तराखंड के टिहरी विकास प्राधिकरण में तैनात सहायक अभियंता दिग्गविजय तिवारी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। वहीं, इस अभियंता पर पहले से ही करीब चार करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए जाने की बात सामने आ रही है। इसके साथ ही उनकी पांच साल की प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने का मुद्दा भी चर्चा में है।
वायरल वीडियो में एक वाहन की डिग्गी खुलती हुई दिखाई देती है और उसमें से एक पैकेट निकाला जाता नजर आता है। वीडियो को दिग्गविजय तिवारी से जोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है। हालांकि, वॉइस नेशन इस वीडियो की सत्यता, समय, स्थान और इसमें दिखाई देने वाले व्यक्तियों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। वीडियो में निकाले गए पैकेट के अंदर क्या है, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है।
वायरल विडिओ
चार करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
दिग्गविजय तिवारी को लेकर सबसे गंभीर सवाल कथित चार करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। यदि इन आरोपों के संबंध में विभागीय रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट या अन्य प्रमाण उपलब्ध हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
सवाल यह भी है कि इतने गंभीर वित्तीय आरोपों के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई है? क्या मामले की जांच हुई है? यदि जांच हुई है, तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? और यदि जांच लंबित है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं?
पांच साल की प्रतिनियुक्ति समाप्त, फिर तैनाती पर सवाल
दिग्गविजय तिवारी की पांच साल की प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने का मुद्दा भी चर्चा में है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने के बाद भी तैनाती जारी है? यदि ऐसा है, तो इसके लिए शासन से क्या अनुमति ली गई है?
प्रतिनियुक्ति से जुड़े नियमों, शासनादेशों और सेवा अभिलेखों के आधार पर ही इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। संबंधित विभाग को इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब जांच और आधिकारिक जवाब का इंतजार
एक ओर कथित चार करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, दूसरी ओर प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त होने का मुद्दा और अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो। इन तीनों पहलुओं को लेकर निष्पक्ष जांच और आधिकारिक जवाब की जरूरत है।
वॉइस नेशन वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता और न ही किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करता है। वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों और प्रतिनियुक्ति से जुड़े तथ्यों की पुष्टि संबंधित अभिलेखों से होना आवश्यक है।
अब सवाल यह है कि टिहरी विकास प्राधिकरण और शासन इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं? क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी और प्रतिनियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएंगे?
