हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कार्रवाई का हाल कुछ ऐसा है कि शिकायतकर्ता न्याय की उम्मीद में चक्कर काट रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मानो आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं। शिकायत दर्ज हुई, फाइल अधिकारियों की मेज तक पहुंची, टिप्पणियां भी लिखी गईं, लेकिन कार्रवाई का अता-पता नहीं। अब RTI से मिले दस्तावेजों ने पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि तत्कालीन मुख्य अभियंता हरिश्चंद्र सिंह राणा के खिलाफ दर्ज शिकायत से संबंधित फाइल को जानबूझकर छिपाया गया और जांच के नाम पर उसे लगातार गुमराह किया गया। शिकायत में पद का दुरुपयोग करने, कथित भ्रष्टाचार और परिवार के लोगों को लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।
*RTI से सामने आया फाइलों का खेल*
RTI से प्राप्त दस्तावेजों में शिकायत संख्या **DAAK/HRDA/2394/25-26 (Establishment)** का विभागीय वर्कफ्लो सामने आया है। दस्तावेजों के अनुसार 25 सितंबर 2025 को शिकायत पर विभागीय प्रक्रिया शुरू हुई। सहायक अभियंता प्रशांत कुमार सेमवाल ने ‘Please check & report’ की टिप्पणी दर्ज की। इसके बाद तकनीकी पर्यवेक्षक अभिजीत सिंह सैनी ने टिप्पणी की कि मामला उनसे संबंधित है और इसे संबंधित अधिकारी को भेजा जाए। 6 दिसंबर 2025 को दोबारा जांच कर रिपोर्ट देने की टिप्पणी भी दर्ज हुई।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस पूरी प्रक्रिया का नतीजा क्या निकला? जांच रिपोर्ट कहां है? कार्रवाई किस स्तर पर हुई? शिकायतकर्ता को जांच का परिणाम क्यों नहीं बताया गया?
**एक साल बाद भी कार्रवाई का इंतजार**
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच और कार्रवाई के नाम पर उसे भ्रमित किया गया। फाइल को लेकर पारदर्शिता नहीं बरती गई और जानबूझकर उसे सामने नहीं आने दिया गया। RTI के माध्यम से सामने आए वर्कफ्लो ने अब अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि शिकायत पर जांच की गई थी तो उसकी रिपोर्ट कहां है? यदि जांच नहीं हुई तो शिकायत को महीनों तक अधिकारियों के बीच क्यों घुमाया जाता रहा? और यदि फाइल छिपाने के आरोप सही हैं तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
**HRDA में अधिकारियों की शिकायतों पर अलग नियम क्यों?**
आम जनता के निर्माण और नक्शों से जुड़े मामलों में कार्रवाई करने वाला प्राधिकरण अपने ही अधिकारियों से संबंधित शिकायतों पर जवाबदेही क्यों नहीं तय कर पा रहा है? क्या विभागीय जांच केवल कागजों पर चलती रहेगी और शिकायतकर्ता दफ्तरों के चक्कर काटता रहेगा?
अब मांग उठ रही है कि शासन इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराए, संबंधित फाइल की स्थिति स्पष्ट करे और शिकायत के निस्तारण में देरी अथवा कथित तौर पर जानकारी छिपाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करे।
**बड़ा सवाल: शिकायत दर्ज हुई, फाइल चली, टिप्पणियां लिखी गईं, RTI में वर्कफ्लो भी सामने आ गया, लेकिन कार्रवाई कहां है? आखिर HRDA में शिकायतों का निस्तारण हो रहा है या उन्हें दबाने का खेल चल रहा है?**
इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
