उत्तराखंड : प्रदेश की राजधानी में खुलेआम जारी अवैध प्लॉटिंग का धंधा, शिकायत के बावजूद सो रहा प्राधिकरण !

Is MDDA kind to those doing illegal plotting? Doesn't even follow his own orders
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उत्तराखंड VN News ब्यूरों : प्रदेश की राजधानी देहरादून में अवैध प्लाटिंग का धंधा खुलेआम जारी है। माफिया पहाड़ों का सीना फाड़कर छलनी करने में जुटे है। मजेदार बात यह है कि शिकायतों के बावजूद भी एमडीडीए के जिम्मेदार अफसर सबकुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे हुए है। कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति जारी है। जिससे अवैध कालोनी माफियाओं को बढ़ावा मिल रहा है। वहीं राजस्व की भी बड़ी हानि हो रही है।

 

कार्रवाई के नाम पर क्यों मिल रही छूट ?
देहरादून उत्तराखंड प्रदेश की राजधानी है लेकिन इन दिनों यहां मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण इलाके में अवैध कालोनी माफिया बड़े स्तर पर सक्रिय है। यहां अवैध रूप से पहाड़ों को छलनी कर अवैध प्लाटिंग का धंधा किया जा रहा है। सब कुछ खुलेआम हो रहा है। इसके बावजूद भी एमडीडीए के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे हुए है। भूमाफिया पहाड़ों को अवैध रूप से छलनी कर कालोनी बसा रहे है। स्थानीय लोगों की मानें तो यह सब एमडीडीए के अफसरों से मिली भगत के बिना संभव नही है।

एमडीडीए के इन इलाकों में माफिया सक्रिय
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के तहत आने वाला कुठाल गेट हो या पुरुकुल या शिव मंदिर के पास का इलाका सब जगह अवैध प्लाटिंग का धंधा जोरों पर है। बताया जाता है उक्त अवैध प्लाटिंग को लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी लेकिन अधिकारी शिकायत की जांच के नाम पर खानापूर्ति कर शांत हो गए। कार्रवाई नही होने की वजह से अवैध रूप से प्लाटिंग करने वाले माफियाओं के हौसलें बुलंद है।

 

शिव मंदिर इलाके में आज भी जारी अवैध प्लाटिंग
प्रदेश की राजधानी क्षेत्र में भूमाफियाओं को हौसले इतने बुलंद है कि एमडीडीए के नोटिस के बाद भी वें अवैध रूप से खुलेआम प्लाटिंग कर रहे है। शिव मंदिर के पास के इलाके में पूर्व में एमडीडीए ने वीरेश जैन को अवैध प्लाटिंग करने के मामले में नोटिस जारी किए थे। एमडीडीए अफसरों ने नोटिस तो जारी कर दिए लेकिन कार्रवाई नही की। जिसका नतीजा यह है कि वह आज भी खुलेआम शिव मंदिर इलाके में प्लाटिंग कर रहे है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एमडीडीए अफसरों व अवैध प्लाटिंग माफियाओं के बीच अच्छी सांठगांठ है। जिस वजह से उन पर कार्रवाई नही होती। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस जारी होती है। यही वजह है कि वें धड़ल्ले से खुलेआम अवैध प्लाटिंग कर रहे है। जिससे भोली भाली जनता उनका शिकार हो रही है।

 

माफियाओं के सामने, अफसर बौने साबित!
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के बाद पकड़ में आई उक्त इलाकों की प्लाटिंग को ध्वस्त की कार्रवाई का खाका बना था लेकिन कार्रवाई शुरू होने से पहले ही वह दम तोड़ गया। एमडीडीए के अधिकारी अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त करने पहुंचे थे लेकिन फोटोबाजी कर बैरंग लौट आए। कहना गलत नही होगा एमडीडीए क्षेत्र में प्लॉटिंग माफिया अफसरों पर भारी है। यही वजह है कि प्रदेश की राजधानी जैसे इलाके में अफसर अवैध प्लाटिंग को नही रोक पा रहे तो प्रदेश भर में क्या स्थिति होगी, सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

 

एमडीडीए की सूची में 102 अवैध प्लॉटिंग
एमडीडीए की वेबसाइट पर सेक्टरवार (01 से लेकर 12) तक अवैध प्लाटिंग की सूची देखी जा सकती है। जिसमें सेक्टर 01 से 06 तक 37 अवैध प्लॉटिंग है। सेक्टर 07 से 10 तक 33 अवैध प्लॉटिंग शामिल है, जबकि सेक्टर 11 व 12 में 32 अवैध प्लॉटिंग को चिह्नित किया गया है। अब आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है कि राजधानी क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग की क्या स्थिति होगी।

अवैध प्लाटिंग से ये होता है नुकसान
अवैध प्लाटिंग में प्रॉपर्टी डीलर प्लॉट बेचकर अधिक से अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, इसलिए वे या तो सड़क की पर्याप्त चौड़ाई, पार्क, नाली निर्माण, मंदिर निर्माण आदि के लिए जगह नहीं छोड़ते या फिर उनका आकार मानक से कम होता है। लेआउट पास कराने पर संबंधित भूस्वामी को एमडीडीए में अच्छी खासी रकम चार्ज जमा करानी होती है, इसलिए वह नियमों का उल्लंघन कर प्लॉट बेचते हैं।

जब लोग ऐसे प्लॉट पर भवन बनाते हैं, तो उन्हें विकास शुल्क के साथ सब-डिवीजन चार्ज भी देना पड़ता है। आवासीय और व्यावसायिक के लिहाज से यह चार्ज सर्किल रेट का सात फीसदी तक होता है। आबादी के नजदीक ऐसे प्लॉट में तो सब-डिवीजन चार्ज देकर भवन का नक्शा पास कराया जा सकता है, लेकिन नए क्षेत्रों में जहां सड़क आदि की उचित व्यवस्था नहीं है, वहां नक्शा पास कराना मुश्किल होता है। प्रॉपर्टी डीलर कृषि भूमि पर भी प्लॉटिंग करते हैं और ऐसे प्लॉट का लेआउट पास नहीं होता। इसलिए यहां भवन निर्माण के लिए नक्शा भी पास नहीं होता। जब तक यह बात सामने आती है, तब तक लोग अपनी मेहनत की कमाई बर्बाद कर चुके होते हैं।

 

 

 

 

 

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