उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) में भारतीय वन सेवा (IFS) के 2025-27 बैच और रॉयल भूटान वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।
प्रमुख बिंदु:
• सतत भविष्य और ज्ञान समन्वय: उन्होंने आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी को भारत के सभ्यतागत और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़ने पर बल दिया।
• तकनीक का उपयोग: वानिकी प्रबंधन में रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन और एआई जैसी आधुनिक तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल का आह्वान किया।
• सफलता का पैमाना: अधिकारियों को सलाह दी गई कि वे अपनी सफलता पदों से नहीं, बल्कि वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और जनविश्वास से मापें।
• महिला भागीदारी: उन्होंने बैच में 17 प्रतिशत महिला अधिकारियों की मौजूदगी को ‘नारी शक्ति’ का प्रमाण बताया।
