टमाटर के दाम में शतक: यहां हुआ टमाटर का दाम 200 रुपये के पार, अन्य सब्जियां बिगाड़ रहीं बजट

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उत्तरकाशी/ देहरादून : एक सप्ताह पूर्व उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय की मंडी में टमाटर के दाम ने शतक मार दिया था तो वहीं गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में टमाटर के दाम 200 रुपये पार कर चुका है। गंगोत्री धाम के व्यापारी जसपाल पंवार का कहना है कि गंगोत्री धाम में टमाटर की एक क्रेट 2500 रुपये से अधिक की बिक रही है। धाम में टमाटर मिलना मुश्किल हो रहा है। वहीं सबसे अधिक समस्या होटलों और ढाबों के किचन में आ रही है।

दूसरी तरफ राजधानी देहरादून में टमाटर के दाम में आई हल्की गिरावट से लोगों को बड़ी राहत मिली है। एक सप्ताह बाद इसमें और गिरावट आने की उम्मीद है। हालांकि, अन्य सब्जियों के बढ़ते दाम लोगों का बजट बिहाड़ रहे हैं। बृहस्पतिवार को देहरादून में टमाटर के थोक दाम 50 रुपये प्रति किलो रहा। जबकि, फुटकर पर टमाटर 80 से 90 रुपये प्रति किलो बिका। हालांकि, फूल गोभी, पत्तागोभी से लेकर भिंडी जैसी सब्जियां के दाम बढ़ने से लोगों को झटका लगा है।

मई में जो फूलगोभी 30 रुपये किलो थी वह अब 50 से 60 रुपये किलो बिक रही है। पत्ता गोभी 30-40 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 70 रुपये किलो है। निरंजपुर मंडी के निरीक्षक अजय डबराल ने बताया, अभी चकराता, त्यूणी और थत्यूड़ समेत हिमाचल के कुछ हिस्सों से टमाटर दून पहुंच रहा है। 15 जुलाई के बाद टमाटर के दामों में कमी आएगी। इसके साथ ही कर्नाटक से भी इसी महीने से आपूर्ति शुरू होगी जिससे रेट सामान्य होने की उम्मीद है।

 

आधी रह गई पहाड़ी टमाटर की बिक्री
उत्पादन प्रभावित होने से पहाड़ के टमाटर की आवक भी कम हो गई है। सामान्य दिनों में एक हजार क्विंटल तक टमाटर बेचने वाले देहरादून जिले में अब महज 475 क्विंटल टमाटर आ रहा है। इसमें 428 क्विंटल पहाड़ी टमाटर और 45 क्विंटल बाहरी राज्यों का है। मंडी में पहाड़ के टमाटर की कीमतें सबसे अधिक हैं। सामान्य दिनों में पहाड़ का टमाटर 500 से 600 क्विंटल प्रतिदिन अन्य राज्यों को भेजा जाता है लेकिन उत्पादन कम होने के कारण स्थानीय आपूर्ति कर पाना ही संभव नहीं हो रहा है। इसलिए अब अन्य राज्यों में महज 150 से 200 क्विंटल टमाटर ही प्रतिदिन जा रहा है।

करीब दो-तीन माह पूर्व टमाटर की कीमतें काफी गिर गई थीं। तीन से चार रुपये प्रति किलो तक थोक में बिका। इसका असर यह हुआ कि किसानों ने टमाटर की पैदावार कम कर दूसरी फसल उगा ली। बरसात अधिक होने से भी टमाटर की फसल बर्बाद हो गई। पैदावार कम होने से रेट बढ़ गए। इसका असर पहाड़ी क्षेत्रों के टमाटर पर भी पड़ा है। -विजय प्रसाद थपलियाल, सचिव, मंडी समिति

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