दो-दो जांच में महाघोटाला साबित, फिर भी ‘अभयदान’! आखिर MDDA के ‘दागी’ प्रशांत सेमवाल पर मेहरबान कौन?
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) में मानचित्र स्वीकृति के गंभीर धांधली का मामला अब बेनकाब हो चुका है। उत्तराखंड शासन के सख्त निर्देश (पत्र संख्या: 405163/1676/V-2/2026-90328/CC/2/2025-5(रिट)/25, दिनांक 15 जून 2026) के बाद हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) के सचिव प्रत्युष सिंह ने आवास अनुभाग-2 को अपनी अंतिम संयुक्त जांच रिपोर्ट (पत्र संख्या: 1356/अभि0-01(क)-विविध/2026-27, दिनांक 25 जून 2026) सौंप दी है।
इस मामले में जांच हेतु गठित समिति के दो उच्च अधिकारियों—सहायक अभियंता सुनील कुमार गुप्ता और अजय कुमार मालिक ने अभिलेखों और पत्रावलियों की गहन पड़ताल के बाद अपनी संयुक्त जांच आख्या सौंप दी है। जांच में मानचित्र स्वीकृति में हुई बड़ी धांधली और भ्रष्टाचार की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें प्रशांत सेमवाल व अन्य संबंधितों की सीधी संलिप्तता और दोष सिद्ध पाया गया है।
HRDA में भी खुलेंगी फर्जी फाइलों की परतें!
सूत्रों का दावा है कि घपलेबाजी का यह खेल सिर्फ MDDA तक ही सीमित नहीं है। बहुत जल्द हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) में प्रशांत सेमवाल द्वारा पास किए गए गलत और संदिग्ध नक्शों का भी बड़ा खुलासा होने जा रहा है। चर्चा है कि HRDA में तैनाती के दौरान भी नियमों को ताक पर रखकर कई गलत फाइलें धड़ाधड़ पास की गई थीं। HRDA से जुड़ी पत्रावलियों की भी जांच जारी है और जल्द ही वहां के फर्जीवाड़े का भांडाफोड़ भी सार्वजनिक होगा।
तीखे सवाल: जब जुर्म साबित, तो फिर मेहरबानी क्यों?
सरकारी कागजों पर आरोप सिद्ध होने और जांच रिपोर्ट टेबल पर आने के बावजूद जिस तरह से कार्रवाई पर ब्रेक लगा है, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की मंशा पर कटघरा खड़ा कर दिया है, किसका वरदहस्त बचा रहा है कुर्सी? दो-दो स्तर की विभागीय और संयुक्त जांच में दोषी करार दिए जाने के बाद भी प्रशांत सेमवाल के खिलाफ निलंबन या एफआईआर (FIR) जैसी दंडात्मक कार्रवाई क्यों रोकी गई है?
फाइलों को दबाने वाला सिंडिकेट कौन? क्या एमडीडीए, एचआरडीए और शासन के भीतर बैठा कोई ताकतवर गठजोड़ इस भ्रष्ट तंत्र को ढाल बनकर बचा रहा है?
ज़ीरो टॉलरेंस पर करारा तमाचा: एक तरफ राज्य सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का ढोल पीटती है, वहीं दूसरी ओर ठोस सबूत और जांच आख्या होने के बाद भी दागी अफसरों पर कार्रवाई न होना इस नीति की धज्जियां उड़ा रहा है।
कार्रवाई का इंतजार या लीपापोती की तैयारी?
जांच आख्या की प्रति उपाध्यक्ष (MDDA) और सचिव (आवास विभाग) को भेजी जा चुकी है। अब देखना यह है कि शासन के आला अफसर इस खुली धांधली पर तुरंत कड़ा चाबुक चलाते हुए दोषियों पर शिकंजा कसते हैं या फिर ‘सेटिंग-गेटिंग’ के खेल में इस रिपोर्ट को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। अब सबकी नजरें सचिव आवास के अगले कदम पर टिकी हैं।
