भूमि घोटाले की छाया में भी चमकी कमेंद्र सिंह की कार्यशैली, जनता के बीच बनाई विशेष पहचान

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हरिद्वार।

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उत्तराखंड के तेजी से बढ़ते और संवेदनशील जिलों में शामिल हरिद्वार में प्रशासनिक बदलाव कोई नई बात नहीं। औसतन हर 18 महीने में जिलाधिकारी की तैनाती होती रही है। लेकिन हाल ही में नगर निगम भूमि घोटाले की जांच के चलते चर्चा में आए पूर्व डीएम कमेंद्र सिंह ने अपने कार्यकाल में जो प्रशासनिक अनुशासन और जनसंपर्क की मिसाल पेश की, उसने उन्हें उनके पूर्ववर्तियों से अलग एक विशेष पहचान दिलाई है।

जांच के घेरे में नाम, लेकिन छवि बनी मजबूत

नगर निगम भूमि घोटाले की जांच में तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी प्रमुख आरोपी माने जा रहे हैं। एसडीएम अजयवीर सिंह और तत्कालीन जिलाधिकारी कमेंद्र सिंह का नाम भी जांच के दायरे में है। हालांकि अभी तक किसी अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है, और न ही किसी को दोषी ठहराया गया है।

इसके बावजूद कमेंद्र सिंह की जनसुलभता, समयबद्धता और ईमानदारी के चर्चे आमजन में व्यापक हैं, और उनकी कार्यशैली इस संकट काल में भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

समय के पाबंद, जन संवाद में अग्रणी

कमेंद्र सिंह की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता रही—समय की पाबंदी और आम नागरिकों से सीधा संवाद। वह प्रतिदिन सुबह 10 बजे कार्यालय में उपस्थित रहते थे, जो अब एक परंपरा का रूप ले चुकी है।

उन्होंने अचानक विभागीय निरीक्षण कर अधिकारियों और कर्मचारियों को समय के प्रति जागरूक किया। इसका सीधा लाभ जनता को मिला—फाइलों की गति तेज हुई और शिकायतों का निस्तारण भी समयबद्ध ढंग से होने लगा।

कोई भी व्यक्ति—चाहे वृद्ध पेंशन की समस्या लेकर आए या किसी पटवारी की शिकायत—बिना किसी सिफारिश के जिलाधिकारी से मिल सकता था, और समाधान की पहल भी उसी गंभीरता से की जाती थी।

जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता

अपने कार्यकाल में कमेंद्र सिंह ने विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग, सरकारी सेवा वितरण की गुणवत्ता और जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण को प्राथमिकता दी। उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण ने एक नई कार्यसंस्कृति को जन्म दिया, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों ही अहम स्तंभ रहे।

हरिद्वार को मिले एक ‘जनसेवक डीएम’

भूमि घोटाले की जांच जारी है और जब तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं आ जाता, किसी भी अधिकारी को दोषी करार देना अनुचित होगा। लेकिन प्रशासनिक पद की सीमाओं के बावजूद कमेंद्र सिंह ने जिस सहजता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य किया, उसने उन्हें जनता के बीच एक ईमानदार जनसेवक की छवि दी है।

हरिद्वार के नागरिकों के लिए वे अब तक के सबसे सुलभ और सजग जिलाधिकारी माने जा रहे हैं—एक ऐसा प्रशासक, जो अपने पद की गरिमा के साथ-साथ आमजन की समस्याओं को प्राथमिकता देता रहा।

 

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