देहरादून में अवैध प्लॉटिंग और गलत नक्शा पास करने के मामले को उजागर करने वाले एक पत्रकार को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। भूमाफिया और रियल्टी स्टूडियो से जुड़े गुर्गों ने पत्रकार को फोन कर धमकी दी। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया है।
मामला: अवैध प्लॉटिंग और धमकी का खुलासा
- अवैध प्लॉटिंग की शिकायत:
खाला गांव और आसपास के इलाकों में श्यामसुंदर गोयल, संजीव तोमर और उनके साथियों द्वारा अवैध प्लॉटिंग की जा रही थी। एमडीडीए (मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण) को इसकी शिकायत बार-बार की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। - एमडीडीए का नोटिस:
मामला मीडिया में आने के बाद एमडीडीए ने 14 मई को अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ नोटिस जारी किया और 16 मई को ध्वस्तीकरण का आदेश दिया। - माफियाओं में हड़कंप:
जब यह खबर सुर्खियों में आई, तो अवैध प्लॉटिंग करने वालों में हड़कंप मच गया।
पत्रकार को धमकी देने का मामला
- फोन पर धमकी:
भूमाफिया के एक गुर्गे ने पत्रकार को फोन कर कहा:
“तुम्हारी वजह से एमडीडीए ने मेरा पास हुआ नक्शा कैंसिल कर दिया है। मैं तुम्हें नहीं छोड़ूंगा। तुम्हें ढूंढ रहा हूं, और मिलने पर इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।” - फर्जी नाम का इस्तेमाल:
धमकी देने वाले ने अपनी पहचान छुपाते हुए खुद को कुंदन लाल बताया, लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि यह व्यक्ति श्यामसुंदर गोयल के सहयोगियों में से एक था।
सहायक अभियंता पर भी गंभीर आरोप
पत्रकार ने आरोप लगाया कि धमकी दिलवाने में एमडीडीए के तत्कालीन सहायक अभियंता का भी हाथ है।
- मोबाइल नंबर लीक:
सहायक अभियंता ने कथित तौर पर भूमाफिया को पत्रकार का मोबाइल नंबर दिया। - जिम्मेदारी का दावा:
पत्रकार ने कहा,
“अगर मेरे साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसके लिए भूमाफिया और सहायक अभियंता जिम्मेदार होंगे।”
पुलिस की कार्रवाई
- मुकदमा दर्ज:
पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने भूमाफिया और उसके गुर्गों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। - जांच जारी:
पुलिस ने धमकी देने वाले व्यक्ति और पूरे गिरोह के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
एमडीडीए की भूमिका पर सवाल
- मिलीभगत के आरोप:
पत्रकार और स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि एमडीडीए के कुछ अधिकारियों की भूमाफियाओं से मिलीभगत के कारण कार्रवाई में देरी हो रही थी। - बार-बार नोटिस, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं:
तीन वर्षों से एमडीडीए अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ नोटिस जारी कर रहा था, लेकिन इसे लागू करने में विफल रहा।
पत्रकार का साहस और प्रतिक्रिया
- धमकियों के बावजूद पत्रकार ने कहा,
“मैं धमकियों से डरने वाला नहीं हूं। मैंने हमेशा सच्चाई के पक्ष में आवाज उठाई है और आगे भी उठाऊंगा।” - पत्रकार ने यह भी कहा कि इस घटना ने प्रशासन और भूमाफियाओं के गठजोड़ को उजागर किया है।
देहरादून में अवैध प्लॉटिंग का यह मामला न केवल प्रशासनिक निष्क्रियता को उजागर करता है, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
- पुलिस की इस मामले में त्वरित कार्रवाई प्रशंसनीय है, लेकिन अवैध प्लॉटिंग और माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।
- पत्रकार और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
“अवैध प्लॉटिंग और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना आवश्यक है, ताकि कानून का राज स्थापित हो सके।”
