कुंभ में नियमों को ताक पर रख तैनाती का मामला गरमाया, सच उजागर करने वाले पत्रकार को धमकी

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हरिद्वार। कुंभ मेले जैसे अति संवेदनशील और करोड़ों की योजनाओं वाले आयोजन में नियमों को ताक पर रखकर उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम से अधिकारी राजन सिंह की तैनाती का मामला अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण को लगातार उजागर कर रहे पत्रकार विपुल पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि अब खबरों को रोकने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है और फर्जी मुकदमों में फंसाने तक की धमकियां दी जा रही हैं।

 

पत्रकार द्वारा जिलाधिकारी हरिद्वार एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि वह पिछले कई दिनों से तथ्यों के आधार पर खबरें प्रकाशित कर रहे हैं। खबरों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर उत्तराखंड सरकार की डेपुटेशन नीति को दरकिनार कर एक बाहरी अधिकारी को कुंभ जैसे बड़े आयोजन में किसके संरक्षण में तैनात किया गया?

 

मामले के सामने आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अब पत्रकारिता की आवाज दबाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा फोन कॉल, संदेश और अन्य माध्यमों से धमकी दी जा रही है कि यदि खबरें नहीं रोकी गईं तो पत्रकार को फर्जी मुकदमों में फंसा दिया जाएगा।

 

इस पूरे घटनाक्रम पर पत्रकार विपुल पाण्डेय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—

 

“हम फर्जी मुकदमों और दबाव की राजनीति से डरने वाले नहीं हैं। जनहित और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। यदि नियमों को तोड़कर कुंभ जैसे संवेदनशील आयोजन में नियुक्तियां की गई हैं तो उसका सच जनता के सामने आएगा। बहुत जल्द यह पूरा मामला न्यायालय के समक्ष रखा जाएगा और संबंधित अधिकारी कटघरे में खड़े दिखाई देंगे।”

 

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में पत्रकारिता का काम सत्ता और सिस्टम से सवाल पूछना है, न कि दबाव में आकर सच छिपाना। यदि किसी पत्रकार को सिर्फ तथ्यात्मक खबरें चलाने पर धमकियां मिल रही हैं तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र दोनों पर सीधा हमला है।

 

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर नियम विरुद्ध हुई तैनाती की जांच होगी या फिर पूरे मामले को दबाने के लिए सच सामने लाने वालों को ही निशाना बनाया जाएगा? प्रशासन की चुप्पी भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

 

सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है तथा न्यायालय में याचिका दायर होने के बाद कई अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं।

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