देहरादून
राजधानी देहरादून में प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जिलाधिकारी कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर एक सेवानिवृत्त अधिकारी के माध्यम से कामकाज कराया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सेवानिवृत्त अधिकारी राजेश कपिल को स्मार्ट सिटी से जुड़े कार्यों के लिए रखा गया था, लेकिन अब उनसे जिलाधिकारी कार्यालय के कई काम भी कराए जाने की चर्चा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी व्यक्ति को जिलाधिकारी से मुलाकात करनी होती है, तो पहले राजेश कपिल से संपर्क करने की बात कही जाती है। उनके माध्यम से ही जिलाधिकारी से मिलने का रास्ता बताया जाता है। इससे पूरे प्रशासनिक सिस्टम की पारदर्शिता और नियमों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि जिलाधिकारी आवास पर मौजूद गिरीश पांडे का एक कथित बयान भी चर्चा में है, जिसमें वे कहते सुनाई देते हैं कि जिलाधिकारी से मिलने से पहले राजेश कपिल से संपर्क करना होगा, उसके बाद ही मुलाकात संभव हो पाएगी। यदि यह सच है तो यह न सिर्फ प्रशासनिक मर्यादाओं पर सवाल है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आखिर एक सेवानिवृत्त अधिकारी को इतना अधिकार कैसे मिल गया।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा सिस्टम चल रहा है? क्या जिलाधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली अब एक रिटायर्ड अधिकारी के भरोसे चल रही है? और क्या लोगो को अपने जिलाधिकारी से मिलने के लिए अब किसी “मध्यस्थ” का सहारा लेना पड़ेगा?
यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या सफाई देता है और क्या इस गंभीर प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं।
