CM Dhami: पहले चाय बनाई फिर सभी को पिलाई…मॉर्निंग वॉक पर निकले मुख्यमंत्री ने इस तरीके से किया जनता से संवाद
रिपोर्ट: आकाश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सुबह-सुबह भराड़ीसैंण में न सिर्फ चाय की चुस्कियों का आनंद लेते दिखे, बल्कि चाय बनाते भी नजर आए। सीएम धामी विधानसभा सत्र के लिए यहां पहुंचे थे। सत्र कल बुधवार को खत्म हो गया है।
सीएम ने कहा कल विधानसभा सत्र के समापन के बाद भराड़ीसैंण में रुक कर कुछ समय और स्थानीय जनजीवन से जुड़ने का अवसर मेरे लिए विशेष है। गैरसैंण केवल हमारी ग्रीष्मकालीन राजधानी ही नहीं, बल्कि एक सुंदर, संभावनाओं से भरपूर पर्यटन स्थल भी है। यहां की मनमोहक वादियों, शुद्ध पर्वतीय हवा और शांत वातावरण में एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव होता है। सुबह की सैर के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय प्रतिष्ठान पर चाय का आनंद लिया।
सीएम धामी ने कहा कि यहां की खूबसूरत वादियां, स्वच्छ पर्वतीय हवा और शांत वातावरण ऊर्जा और सुकून का अहसास कराते हैं।
देश की सबसे अधिक 5410 फीट ऊंचाई पर बसी विधानसभा पहाड़ के सपनों की ग्रीष्मकालीन राजधानी है।
वर्ष 2014 में पहली बार गैरसैंण में टेंट में विधानसभा सत्र हुआ था और भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन का शिलान्यास पशुपालन विभाग की 47 एकड़ भूमि पर किया गया।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सुबह-सुबह भराड़ीसैंण में न सिर्फ चाय की चुस्कियों का आनंद लेते दिखे, बल्कि चाय बनाते भी नजर आए। सीएम धामी विधानसभा सत्र के लिए यहां पहुंचे थे। सत्र कल बुधवार को खत्म हो गया है।
सीएम ने कहा कल विधानसभा सत्र के समापन के बाद भराड़ीसैंण में रुक कर कुछ समय और स्थानीय जनजीवन से जुड़ने का अवसर मेरे लिए विशेष है। गैरसैंण केवल हमारी ग्रीष्मकालीन राजधानी ही नहीं, बल्कि एक सुंदर, संभावनाओं से भरपूर पर्यटन स्थल भी है। यहां की मनमोहक वादियों, शुद्ध पर्वतीय हवा और शांत वातावरण में एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव होता है। सुबह की सैर के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय प्रतिष्ठान पर चाय का आनंद लिया।
सीएम धामी ने कहा कि यहां की खूबसूरत वादियां, स्वच्छ पर्वतीय हवा और शांत वातावरण ऊर्जा और सुकून का अहसास कराते हैं।
देश की सबसे अधिक 5410 फीट ऊंचाई पर बसी विधानसभा पहाड़ के सपनों की ग्रीष्मकालीन राजधानी है।
वर्ष 2014 में पहली बार गैरसैंण में टेंट में विधानसभा सत्र हुआ था और भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन का शिलान्यास पशुपालन विभाग की 47 एकड़ भूमि पर किया गया।
