राष्ट्रीय शिक्षा नीति

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रिपोर्ट: आकाश

 

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत हाईस्कूल की साल में दो बार परीक्षाएं कराने की तैयारी है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में एनईपी के तहत परीक्षा पैटर्न एवं अन्य प्रावधानों को समाहित करने के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में भारत दर्शन योजना, क्लस्टर स्कूल भवनों की डीपीआर पर चर्चा के साथ ही हर काम के लिए समय तय करने के निर्देश दिए। बैठक में शिक्षा सचिव रविनाथ रामन, अपर सचिव रंजना राजगुरू आदि मौजूद रहे।

 

अगले साल 5000 छात्र करेंगे भारत दर्शन

मुख्य सचिव ने माध्यमिक शिक्षा के तहत भारत दर्शन योजना को विस्तारित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस साल कम से कम एक हजार छात्र-छात्राओं को भारत दर्शन कराया जाएगा। जबकि अगले साल इसे बढ़ाकर पांच हजार का लक्ष्य रखा जाए। उन्होंने भारत दर्शन यात्रा के दिवसों को बढ़ाकर सात दिन करने के निर्देश दिए। भारत के प्रतिष्ठित विज्ञान एवं तकनीकी संस्थानों के साथ ही सैन्य प्रतिष्ठानों के भ्रमण का भी आयोजन करें।

 

क्लस्टर स्कूल भवनों के लिए डीपीआर एक महीने में तैयार करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने प्रस्तावित 559 क्लस्टर विद्यालयों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने अगले एक माह में सभी चिह्नित क्लस्टर विद्यालय भवनों की डीपीआर तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने इनके लिए चयनित कार्यदायी संस्थाओं के विभागाध्यक्षों को एक महीने में डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। सीएस ने स्मार्ट क्लास एवं कंप्यूटर लैब निर्माण कार्यों की डीपीआर भी एक माह में तैयार करने के निर्देश दिए। क्लस्टर स्कूलों के छात्र-छात्राओं को परिवहन सुविधा के लिए डीएम की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समितियों की बैठकें शीघ्र आयोजित करने के निर्देश दिए।

 

हर काम के लिए समय हो तय

मुख्य सचिव ने विद्यालयों के लिए सभी प्रस्तावित छात्रावास की डीपीआर भी एक महीने में तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, निर्माण कार्यों में देरी न हो इसके लिए हर काम की समय सीमा तय की जाए, साथ ही सचिव, अपर सचिव एवं महानिदेशक स्तर पर लगातार कार्यों की समीक्षा की जाए। प्रदेश में आवासीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाए जाने पर भी जोर दिया गया। निर्देश दिया कि आवासीय विद्यालयों में एक वाहन उपलब्ध कराया जाए, ताकि मेडिकल इमरजेंसी एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में होने वाली समस्याओं से बचा जा सके।

 

 

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